धान खरीदी योजना में लापरवाही पर 1 पटवारी सस्पेंड किसानों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई

धान खरीदी योजना में लापरवाही पर 1 पटवारी सस्पेंड: पूरी जानकारी

भारत में कृषि केवल किसानों का पेशा ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। खासकर धान और गेहूं जैसी फसलों के लिए सरकार की MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना किसानों के लिए जीवन रेखा की तरह है। इस योजना के माध्यम से किसान अपने उत्पादन का उचित मूल्य सुनिश्चित कर पाते हैं। लेकिन अगर इस प्रक्रिया में लापरवाही होती है, तो इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धान खरीदी प्रक्रिया में लापरवाही के कारण एक पटवारी को निलंबित किया गया।

राज्य शासन की प्राथमिकता वाली धान खरीदी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में लापरवाही बरतना ग्राम कमरगा के हल्का पटवारी को भारी पड़ गया। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर लैलूंगा एसडीएम द्वारा ग्राम कमरगा के हल्का पटवारी जितेन्द्र भगत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें तहसील मुख्यालय लैलूंगा में संलग्न किया गया है तथा इस अवधि में उन्हें मूलभूत नियम 53 के अंतर्गत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक समितियों एवं उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से पंजीकृत किसानों से धान खरीदी की जा रही है।इसके लिए सभी संबंधित पटवारियों एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को किसानों के धान उत्पादन का भौतिक सत्यापन करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में 22 दिसंबर 2025 को ग्राम कमरगा के हल्का पटवारी जितेन्द्र भगत से धान सत्यापन के संबंध में जानकारी मांगी गई, परंतु वे संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके।

उनके द्वारा मात्र तीन किसानों के पंचनामा प्रस्तुत किए गए, जिनमें केवल किसानों का नाम और हस्ताक्षर अंकित थे, जबकि आवश्यक विवरण एवं सत्यापन से संबंधित कोई जानकारी दर्ज नहीं थी। अतिरिक्त जानकारी पूछे जाने पर भी उनके द्वारा किसी प्रकार का संतोषप्रद उत्तर नहीं दिया गया।

प्रकरण की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित पटवारी द्वारा शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के पालन में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता बरती गई है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966 के नियम 03 के विपरीत होकर कदाचार की श्रेणी में आता है। परिणामस्वरूप जितेन्द्र भगत को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनके हल्के का प्रभार केशव प्रसाद पैकरा को सौंपा गया है।


 धान खरीदी योजना का महत्व

धान खरीदी योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य देना है। MSP (Minimum Support Price) के जरिए सरकार सुनिश्चित करती है कि किसानों को बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद उनकी फसल का न्यूनतम मूल्य मिले।

धान खरीदी से न केवल किसान की आमदनी सुनिश्चित होती है बल्कि इससे देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। इस योजना के तहत सरकारी केंद्रों और मंडियों में किसानों से धान खरीदा जाता है और उनका भुगतान समय पर किया जाता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लगभग 87 लाख टन धान खरीदा गया और किसानों को 7771 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह इस योजना की पैमाने और प्रभाव को दर्शाता है।Indiatimes


 धान खरीदी प्रक्रिया

धान खरीदी प्रक्रिया कुछ चरणों में पूरी की जाती है।

किसान पंजीकरण

किसानों को पहले पंजीकरण करना होता है ताकि वे MSP पर अपनी फसल बेच सकें। इसके लिए डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाता है। पंजीकरण के बाद किसानों को टोकन मिलता है, जिससे खरीदी केंद्र पर उनकी प्राथमिकता सुनिश्चित होती है।

 गुणवत्ता और वजन जांच

खरीदी केंद्र पर धान की गुणवत्ता, नमी और वजन की जांच की जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि किसान को MSP पर सही भुगतान मिले।

खरीदी केंद्र संचालन

सरकारी मंडियां, सहकारी समितियां और अन्य एजेंसियां धान की खरीदी करती हैं। हर केंद्र पर पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।

 भुगतान प्रक्रिया

किसानों को उनका भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाता है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।


 लापरवाही की शिकायतें

धान खरीदी में कई बार लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती हैं।

  • कुछ केंद्रों पर खरीदी प्रक्रिया में देरी और अव्यवस्था के कारण किसानों को परेशानी हुई।

  • पंजीकरण और भुगतान में अनियमितताएं हुईं।

  • फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों के मामले सामने आए।

  • गोदामों में धान का लंबे समय तक रखे जाने से खराब होने की शिकायतें आईं।

इन समस्याओं से किसान आर्थिक रूप से प्रभावित होते हैं और सरकारी योजनाओं पर विश्वास कम हो जाता है।


 पटवारी की भूमिका

पटवारी ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड, फसल डेटा और किसानों के पंजीकरण की निगरानी करता है। धान खरीदी प्रक्रिया में उसकी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं:

  • किसान के रिकॉर्ड की सत्यापन

  • पंजीकरण और खरीदी डेटा का प्रबंधन

  • खरीदी केंद्रों पर दस्तावेजों की जांच

  • शिकायतों का निस्तारण और नियमों का पालन

पटवारी की भूमिका सिस्टम की पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


 पटवारी का निलंबन

हाल ही में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में किसानों की शिकायत पर पटवारी राजेश शर्मा को निलंबित किया गया। शिकायतों के अनुसार, पटवारी ने पंजीकरण और अन्य कार्यों में देरी की, जिससे किसानों को उनके MSP पर धान बेचने में समस्या आई।

उपमुख्यमंत्री ने मौके पर ही इस मामले की समीक्षा की और पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


निलंबन की प्रक्रिया और कानूनी आधार

पटवारी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत निलंबित किया गया।

  • नियम 9(1) के तहत यदि कोई सरकारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों में गंभीर लापरवाही करता है, तो उसे निलंबित किया जा सकता है।

  • निलंबन के दौरान अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाता है।

  • अधिकारी को जवाब देने का अवसर भी प्रदान किया जाता है, हालांकि प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकता है।


 लापरवाही के नकारात्मक प्रभाव

अगर धान खरीदी में लापरवाही होती है:

  • किसान MSP का लाभ नहीं पा पाते

  • भुगतान में देरी या कमी होती है

  • सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है

  • भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का खतरा बढ़ता है

  • किसानों की नाराजगी और विरोध बढ़ता है


 सुधार और सकारात्मक पहल

सरकार ने धान खरीदी प्रक्रिया में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • डिजिटल पंजीकरण और टोकन प्रणाली

  • खरीदी केंद्रों में ऑडिट और निरीक्षण

  • अवैध धान परिवहन रोकने के लिए विशेष कार्रवाई

  • शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करना

  • अधिकारियों के प्रशिक्षण और निगरानी बढ़ाना

इन पहलों का उद्देश्य पारदर्शिता और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।


 किसानों के लिए सुझाव

किसान अपनी धान MSP प्रक्रिया में निम्न कदम उठा सकते हैं:

  • पंजीकरण के समय सभी दस्तावेज सही रखें

  • टोकन समय पर प्राप्त करें

  • खरीदी केंद्र पर गुणवत्ता और नमी जांच करवाएं

  • किसी भी अनियमितता की शिकायत तुरंत दर्ज करें

  • स्थानीय अधिकारी या उच्च प्रशासन से संपर्क करें

  • किसान संघ और समितियों के माध्यम से सामूहिक आवाज उठाएं

धान खरीदी योजना केवल फसल खरीदने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यदि इस प्रक्रिया में लापरवाही होती है, तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। पटवारी जैसे अधिकारियों का निलंबन यह दर्शाता है कि सरकार MSP और किसानों के अधिकारों की रक्षा को गंभीरता से ले रही है।

सरकार के कदम और सुधारात्मक पहलें यह सुनिश्चित करते हैं कि किसानों को समय पर भुगतान मिले और योजना के उद्देश्यों की पूर्ण रूप से पूर्ति हो। किसानों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई और लापरवाही करने वाले अधिकारियों का निलंबन यह संदेश देता है कि किसान हमेशा प्राथमिकता में हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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